
तेरी कृपा का तलबगार हूँ मैं भजन लिरिक्स
पापी नालायक हूँ गुनहगार हूँ मैं,तेरी कृपा का तलबगार हूँ

पापी नालायक हूँ गुनहगार हूँ मैं,तेरी कृपा का तलबगार हूँ

मिल जाय हमको साथ तुम्हारा, सर पे हो प्रभु हाथ

दोहा : सुनते हो सबकी व्यथा, प्रभु देकर के ध्यान,मैं

किस्मत संवर गयी है तेरी शरण में आकर,जीने लगे है


तुम्हें नाथ दीनों को, निभाना पड़ेगा – २,तभी दीनबन्धु जमाना

आ गये तेरी शरण हम, कर दया अपनाइये,कर दया अपनाइये

शरण मोहे रखवो अपनी श्याम,दीनबन्धु दीनन हितकारी, अखिल लोक विश्राम

धन्य हमारे गुरुवर, जो श्याम से हमको मिला गये,भगती की

तू मेरा ही सांवरा है, कहता हूं ये महफिल में,मैं