


क्या बताऊँ दादी जी ने क्या नहीं किया,गिर रहा था

एक बार आजा दादी, तुझको निहार ल्यूं,मनड़े मं दादी थारी,

बैठी झुन्झुनू में लगाके दरबार, राणी सती राज करे,या तो

दादी जी के मंदरिये में मोर नाचे,घन-घन घंटा शंख नगाड़ा,

बचाल्यो आज दादीजी, मन्ने थारो सहारो है।पड़ी मझधारां मं नैया,


लॉटरी लग जाएगी…किस्मत खुल जाएगी…करो मन से मंगलपाठतो दुनिया बदल

तेरी बेटी आई, तेरा प्यार मांगने,और अमर सुहागण का, वरदान

इतना तू सोचे क्यूं,मैं भी तो बैठी हूं,तेरी हर एक


क्या बताऊँ दादी जी ने क्या नहीं किया,गिर रहा था

एक बार आजा दादी, तुझको निहार ल्यूं,मनड़े मं दादी थारी,

बैठी झुन्झुनू में लगाके दरबार, राणी सती राज करे,या तो

दादी जी के मंदरिये में मोर नाचे,घन-घन घंटा शंख नगाड़ा,

बचाल्यो आज दादीजी, मन्ने थारो सहारो है।पड़ी मझधारां मं नैया,


लॉटरी लग जाएगी…किस्मत खुल जाएगी…करो मन से मंगलपाठतो दुनिया बदल

तेरी बेटी आई, तेरा प्यार मांगने,और अमर सुहागण का, वरदान

इतना तू सोचे क्यूं,मैं भी तो बैठी हूं,तेरी हर एक