
गुरुदेव जैसा, दयालु जहाँ में, कोई नहीं है लिरिक्स
दोहा : सतगुरु गुण की खान है, हरे तेरा अज्ञान,भ्रम

दोहा : सतगुरु गुण की खान है, हरे तेरा अज्ञान,भ्रम


सत्गुरु रखना मेरी लाज,शरणागत् वत्सल हे स्वामी, दया करो महाराज

भाव सुमन ले कर गुरुवर के, सन्मुख जा अर्पण करना


गुरुदेव मेरी नैया,उस पार लगा देना,अब तक तो निभाया है,आगे

गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना,मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों

तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया,जन्मों की प्यास

मेरी लगी गुरु संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने,क्या जाने

विश्वास है तो, सहारा मिलेगा,वही साथ है, ये इशारा मिलेगा

दोहा : सतगुरु गुण की खान है, हरे तेरा अज्ञान,भ्रम


सत्गुरु रखना मेरी लाज,शरणागत् वत्सल हे स्वामी, दया करो महाराज

भाव सुमन ले कर गुरुवर के, सन्मुख जा अर्पण करना


गुरुदेव मेरी नैया,उस पार लगा देना,अब तक तो निभाया है,आगे

गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना,मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों

तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया,जन्मों की प्यास

मेरी लगी गुरु संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने,क्या जाने

विश्वास है तो, सहारा मिलेगा,वही साथ है, ये इशारा मिलेगा