


कलयुग जैसे जैसे, गहराने लगा है, श्याम का निशान, लहराने


कन्हैया एक नज़र जो आज तुझको देखता होगा,मेरे सरकार को


क्यों करे चिंता जब तू हारेगा,तेरी जिंदगी यही सवारेगा ।।

दुनिया ये छलावा है, कहीं तुम भी ना छल जाना,बदले

चालो चालो साथीड़ो खाटू धाम रे,झाला देवे मंदिर में बैठ्यो

