
आछी लागी रे थारी प्रीतडी लिरिक्स
कन्हैया आछी लागी रे थारी प्रीतडी,म्हारे मनडामें उठी रे हिलोर

कन्हैया आछी लागी रे थारी प्रीतडी,म्हारे मनडामें उठी रे हिलोर


नख पर धार लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है ॥

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए ।कलितललितवनमाल जय जयदेव हरे ॥ १॥दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन

प्रीतम तू मोहे प्राणन तें प्यारो । तुम मेरे पुतरिन

अकेली गई थी ब्रज में, कोई नही था मेरे संग



नाम हरी का अनमोल है,अमृत रस है भरा,जितना भजोगे उतना
