
इक बार सांवरे के, दरबार आइये लिरिक्स
इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

नाम हरी का अनमोल है,अमृत रस है भरा,जितना भजोगे उतना

कृपा की नज़र श्याम मुझपे भी करदे,मेरा भी जीवन खुशहाल

भावों को सुनता है कुछ न कहता है,सच्चे प्रेमी से

श्याम दातार है, दातार से फरियाद तो कर,जो भी बख्शा


आ जाओ श्याम प्यारे, तेरा दरबार है सजाया,मन से तुम्हें

हरदम रहता साथ वो मेरे,सांझ कहु या कहु सवेरे,उसकी कृपा


तेरे सिवा ना हो कोई, दिल की बस्ती में,भले ही