


जगत सेठ दातार श्याम के, दर जो जाता है,बिना कहे

उंगली को पकड़ मेरी, चलना मुझे सिखलादो,भटके हुए राही है,

जद जद मैं आँख्यां मीचूं बाबा थांने देखूं,म्हारा सांवरिया थांने

सुन्दर है सिणगार श्याम को जँच रह्यो है,आज सलूणों श्याम

खाटू सै आग्यो फोन सांवरो घर म्हारे आवेलो,ईं शुक्ल पक्ष

उत्सव मं श्याम दातार आज बड़ा प्यारा लागो,सोणा सज्या हो

श्याम जयंती आई, म्हारे मन में उठे हिलोर,खाटू से थांने

मन बावरे करले भरोसो बाबा श्याम पे,दूसरो ना कोई जग

श्याम तेरे बिना हमें ज़ीना नहीं,श्याम तेरे बिना हमें रहना