

मेरा नाथ तू हैं नहीं मैं अकेला, मेरे साथ तू

हम गरीबों से रखता है यारी,नाम उसका है बांके बिहारी

वृंदावन में रहता है वो, उसका नाम कन्हैया है ।।

निकले मेरे प्राण हंसते हंसते, कीर्तन तेरा श्याम करते करते


श्याम आपके नाम की महिमा अमिट अपार,है नाम हजारों तेरे

सारी सृष्टि की करे रखवारी, श्याम प्यारे गोवर्धनधारी,दीनबन्धु यही चक्रधारी,

इस जग का हाल कन्हैया, तुम जानो सब दातार,छुपा नहं

हरि जी मोहे चाकर राखो जी । चाकर रहसूं बाग

फतेहपुर में ठाकुर जी को डंकों बाजै,आं कै उत्सव में