


जादू करके, जादू करके, जादू करके,ओ पिया कित गयो जादू

मेरो मन वृंदावन में अटको,मेरो मन हरि चरणन में अटको,बनके


घनश्याम तुम्हारे मंदिर में,मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ,वाणी में तनिक

मैंने जबसे हरि जी तेरा नाम लिया,अभिमान दिखाना छोड़ दिया,ओ


कोई जाये जो वृन्दावन, मेरा पैगाम ले जाना,मैं खुद तो

जो प्रेम गली में आए नहीं,प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,जिसने

मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है,मिले न