
मैंने जबसे हरि जी तेरा नाम लिया लिरिक्स
मैंने जबसे हरि जी तेरा नाम लिया,अभिमान दिखाना छोड़ दिया,ओ

मैंने जबसे हरि जी तेरा नाम लिया,अभिमान दिखाना छोड़ दिया,ओ


कोई जाये जो वृन्दावन, मेरा पैगाम ले जाना,मैं खुद तो

जो प्रेम गली में आए नहीं,प्रियतम का ठिकाना क्या जाने,जिसने

मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है,मिले न

किस से नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद । आँखों

मैंने झोली फैला दी कन्हैया,अब खजाना तूं प्यार का लूटा

सखी री बांके बिहारी से, हमारी लड़ गयी अँखियां,बचायी थी

सांवरिया नन्द किशोर हाँ किशोर, मेरी साड़ी पे रंग डाल

दर्द किसको दिखाऊं कन्हैया, कोई हमदर्द तुमसा नहीं है,दुनियां वाले