

तेरी प्रीत मेरे दिल में लगी हैह्रदय के पटल पर

बड़ी करूणामयी श्यामा, ये है सरकार दीनों की,बिराजे ऊँचे महलों

मन भा गई इक झलक सांवरे तेरी,फिर क्यों रहे तूँ

साँवरिया ओ साँवरिया, भा गयी तेरी सुरतिया,दिल मं मेरे उतर

हाथ कभी देखे नहीं, फिर भी सर पे फिराता है,पाँव

ओ कान्हा आ रेSS5, तू आजा मोहन गिरधारी,कि तरसे गूजरियां

अरे कान्हा, होले से यूं तेरा मुस्काना,बना देता, हम भगतों

कान्हो, कैसो रूप बणायो रे,बण मणिहारी राधाजी से मिलणे आयो

दिल खो गया दिल खो गया – २,बांके बिहारी श्री

नहीं किसी में इतना दम जो, सुणले हारे की,वरना क्या