साँवरा देख तेरो सिंण्गार मैं तो गयो कालजो हार,
गयो कालजो हार मैं तो, गयो कालजो हार,
गयो कालजो हार मैं तो, गयो कालजो हार,
साँवरा देख तेरो सिंगार मैं तो गयो कालजो हार ।।
शीश मुकुट पर मोर पंख की शोभा अति निराली,
घुघरवाला केश श्याम का कान मैं सोह्रै बाली,
नैना चले वार पे वार, मैं तो गयो कालजो हार,
साँवरा देख तेरो सिंगार मैं तो गयो कालजो हार ।।
केसर तिलक लग्यो मस्तक पर जा मैं हीरो दमकै,
आँख फटी रह जावै देख्याँ मुखड़ो ऐसो चमकै,
होंठाँ लाली करे कमाल, मैं तो गयो कालजो हार,
साँवरा देख तेरो सिंण्गार मैं तो गयो कालजो हार ।।
गल वैजंती माला बाबा बागो घेर घूमेरो,
ताँव देर मूँछा पर बैठो सेठ साँवरो मेरो,
थाने निरखाँ बारम्बार मैं तो गयो कालजो हार,
साँवरा देख तेरो सिंगार मैं तो गयो कालजो हार ।।
लीलो घोड़ो सेवक थारो करे चाकरी थारी,
भीड़ पड़ाँ जद भगत पुकारे करे श्याम असवारी,
यो चाले पवनवेग की चाल मैं तो गयो कालजो हार,
साँवरा देख तेरो सिंण्गार मैं तो गयो कालजो हार ।।




