श्याम के रंग में रंगा हूँ मैं,
मुझे दुनिया से क्या काम है,
सीना चीर के देख लो चाहे,
अंदर बैठा श्याम है,
ओ खाटूवाले तू मेरा,
मैं भी बस हूँ तेरा,
जिसे श्याम सहारा है,
वो कभी ना हारा है ।।
आज नहीं तो कल हो जानी,
मेरी नैया पार है,
लहरों की औकात ही क्या,
जब बाबा खेवनहार है,
ओ खाटूवाले तू मेरा,
मैं भी बस हूँ तेरा,
जिसे श्याम सहारा है,
वो कभी ना हारा है ।।
लेखक – नितेश शर्मा (गोलू) जी




