



खाटू में जो भी आया, फस्ता ही जा रहा है,उन्हें

( रंग रंगीले राजस्थान में,देखे अजब नज़ारे,कण कण में यहाँ


क्यूँ भूल गये श्यामा,मुझे पागल समझ कर भूल गये ॥

तेरे दरबार की महिमा, सुनी जो श्याम घर-घर में,मैं तेरे

भजो रे श्याम भजो प्यारे मनवा, यही काम आयेगा,साथ निभाये

छोटी सी एक अर्जी मेरी,छोटी सी दरकार है,आजा मेरे सांवरे

कार्तिक आया रे आया रे छाई मस्त बहार,भगत सब नाचो