



मोरछड़ी थारे हाथां में हीरो चमके माथा में,थारे गल फूलां

श्याम दातार है, दातार से फरियाद तो कर,जो भी बख्शा

सच्चा दरबार है दरबार में अभिमान ना कर,जो दिया श्याम


है दीनबन्धु शरण हूँ तुम्हारी, खबर लो हमारी।। ये माना

श्यामा म्हारे घरा ले चालू रे,पतली सी पीताम्बरी में सियां

पीला रे पीला, कांईं करो सहेल्यूं ए,पीला म्हारै बाबाजी रा

छाया रे बसंती रंग, लो फागुण आया रे-२,याद श्याम की