
हारे को हरदम, जिताता है तू हीं लिरिक्स
हारे को हरदम, जिताता है तू हीं,रोते को हँसना, सिखाता

हारे को हरदम, जिताता है तू हीं,रोते को हँसना, सिखाता

चालो चालां खाटूधाम, बाबा से मिलण,बाबा स मिलण रे, धणी

रंग तूने प्रेम का जो मुझपे चढ़ाया है,सच कहूँ जीने

आया जो साँवरे के, दरबार सिर झुकाकर,अपना लिया प्रभु ने,

जब से कन्हैया ने, मुझे अपनाया है,मेरे संग संग रहता,

नगरी हो खाटू सी, मन्दिर बस श्याम का हो,मेरी झोपड़ी

तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है,मेरे वास्ते तूंने, क्या क्या

संकट काटो जी साँवरिया, थारो सुणके आयो नाम,संकट काटो जी,जय-जय-जय

दिखता है चुपचाप साँवरा बोलता है,इक रस्ता होता बंद चार

कैसे नजर मिलाऊँ, लायक नहीं मैं तेरे,हे श्याम माफ करदो,