


कीर्तन करतां श्याम, आँधी रात घिर आयी जी,थे कईयाँ देर

मनड़े ने लुभावे, भोली सूरत या म्हारे श्याम की,हूक उठे

श्याम समर्पित हो जा प्यारे, काम तेरे वो आयेगा,फेर के


जिस पल का हमें, बेसब्री से इन्तज़ार है,उस पल के

हारे को हरदम, जिताता है तू हीं,रोते को हँसना, सिखाता

चालो चालां खाटूधाम, बाबा से मिलण,बाबा स मिलण रे, धणी

रंग तूने प्रेम का जो मुझपे चढ़ाया है,सच कहूँ जीने

आया जो साँवरे के, दरबार सिर झुकाकर,अपना लिया प्रभु ने,