


हे नन्द नन्दन तुम्हें मेरा वन्दन,दयाकर दयालु, पलके उघाड़ो,काटो प्रभु

अब तूं ही बता गोपाल, कुण पार लगावेगो – २,कुण

जिन दीवानों की कन्हैया, से पुरानी प्रीत है,उन दीवानों की

मैं तेरा हूँ तूं मेरा है, सदा मेरा ही तूं

प्रभु तुमसे विनती यही है हमारी यही है हमारी,सुनते नहीं

बाबा उन भगतों के, वश में हो जाते हैं,रोज नियम

मैं हारा हूँ, मैं हारा, मुझे दे दे नाथ सहारा,हार

हे दयानिधि घनश्याम, मेरी लाज अब तेरे हाथ हैं,तुम हो

ऐसा दीनबन्धु दातार, नाथ मेरा श्याम मुरारी है,हाSऽ श्याम मुरारी