


(दोहा – जी करदा में घुंघरू पावां,नच-नच के में श्याम

कभी आया साथी बनकर, कभी आया मांझी बनकर,पग पग पर

साँवरे के रहते तुम काहे घबराते हो,छोड़ के जो गया

श्याम भजले, श्याम भजले, श्याम बिना उद्धार नहीं,दूजा तारणहार नहीं,

श्यामधणी है सेठ म्हारो, मोरछड़ी सेठाणी,यो ही है नरसी रो

हेत लगा श्री श्याम प्रभु से, सब कुछ मिलसी रे,जनम-मरण

हे खाटूवाले श्याम, तेरी लीला न्यारी है,कोई जान नहीं पाया,

हे श्यामधणी थारो ऐसो गजब सिंणगार,म्हें थांने देखणो भुलग्या जी
