


सांवरे दिन रात मैं तुझे याद करता हूँ,आ दरश दिखला

मेरी याद आती क्या, कभी श्याम तुमको,मैं तो ना भूलूं,

मिला दरबार दाता का, तो फिर क्यूं और दर जायें,हो

द्वार पर कब से खड़ा हूं, गौर कुछ तो कीजिये,हूं

आवो जी आवो करतार, स्वामी तेरे बिना नहीं चैंन है

गुणगान तेरा गाऊं, प्रभु इतना सा कर दो,हे श्याम कृपा

अभिमान न कर पगले, जीवन इक सपना है,झूठे रिश्ते नाते,

दर्दे जिगर मेरा है, सुनो श्याम सांवरे,दर्शन बिना गरीब के,
