
द्वार पर कब से खड़ा हूं, गौर कुछ तो कीजिये लिरिक्स
द्वार पर कब से खड़ा हूं, गौर कुछ तो कीजिये,हूं

द्वार पर कब से खड़ा हूं, गौर कुछ तो कीजिये,हूं

आवो जी आवो करतार, स्वामी तेरे बिना नहीं चैंन है

गुणगान तेरा गाऊं, प्रभु इतना सा कर दो,हे श्याम कृपा

अभिमान न कर पगले, जीवन इक सपना है,झूठे रिश्ते नाते,

दर्दे जिगर मेरा है, सुनो श्याम सांवरे,दर्शन बिना गरीब के,


सहारा क्या कोई देगा, सहारा श्याम देता है,और तो देके

कर्ज तेरे एहसान का श्याम रहने नहीं देना,तेरा कर्जा चुके


कहते हैं हक से, अधिकार हमारा है,खाटू वाला सांवरिया ही,