
नंगे नंगे पाँव चल आ गया री माँ एक तेरा पुजारी लिरिक्स
नंगे नंगे पाँव चल आ गया री माँ,एक तेरा पुजारी

नंगे नंगे पाँव चल आ गया री माँ,एक तेरा पुजारी

अब के नवरात्रि मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,अंगना पधारो मेरे


अमृत की बरसे बदरिया,अम्बे माँ की दुअरिया ।। दातुर मोर,

श्लोक – चैत महीना और अश्विन मे,आते माँ के नवरात्रे,मुँह

ओ आये तेरे भवन, दे दे अपनी शरण,रहे तुझमें मगन,

कब आओगी घर मेरे, बताओ ना अंबे माँ,सताओ ना अंबे

(दोहा – ढोल नगाड़ों की सदा कह रही है,नवरात्रों की

संगतां ने आंदीयां, मैया दे दर संगतां ने आंदीयां,नवरात्रि देन

आसरो माताजी म्हने थारो,थे कष्ट निवारो,पधारो म्हारे आंगनिये पधारो,थारी तो