

(है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,है शीश

हरि दर्शन की प्यासी अंखियाँ,हरि दर्शन की प्यासी ॥ देख्यो

मुरली बजाने वाले, गिरिवर उठाने वाले,मैं दास हूँ तुम्हारा, मैं

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे ।मन मंदिर

गोविंद चले आओ, गोपाल चले आओ,हे मुरलीधर माधव, नंदलाल चले

अपना प्रेमी बना लो कन्हैया, और कोई तमन्ना नहीं है,और

जीवन है तेरे हवाले, मुरलिया वाले,प्यारे मुरलिया वाले, बांके मुरलिया

श्यामा हृदय कमल सो प्रगट्यौ,श्यामा हृदय कमल सो प्रगट्यौ,और श्याम

(वाणी गुणानु कथने, श्रवणो कथायां,हस्तौ च कर्मसु मनस्तव पादयोर्न:,स्मृत्यां शिरस्तव

तू है सखी बड भाग बड़ी,नन्दलाल तेरे घर आवत है….