तुझे झूला में झुलाऊँगा, सावन को आने दो,
सावन… को आने दो ।।
तर्ज – सावन को आने दो ।
अम्बुआ की हरी भरी डारी, डारी पे झूला डलाऊँ,
तुझको बिठा के कन्हैया, धीरे धीरे झूला झुलाऊँ,
पेंगे लगाऊंगा, कजरी सुनाऊंगा,
में झूम के गाऊंगा,
सावन… को आने दो ।।
सुख दुःख के झूले में झूले, परिवार मेरा ये सारा,
ऐसे में कैसे सजाऊँ, झूला कन्हैया तुम्हारा,
जब चैन ना पाउँगा, नहीं देर लगाऊंगा,
में दौड़ के आऊंगा,
सावन… को आने दो ।।
झूला झुलाऊँगां तुमको, पर शर्त है ये हमारी,
में तुमको भजन सुनाऊँ, बंसी बजे जब तुम्हारी,
फूलों से सजाऊंगाँ, ‘बेधड़क’ रिझाऊंगा,
दरबार में आऊंगा,
सावन… को आने दो ।।
लेखक – पप्पू बेधड़क जी




