प्रगटी श्री राधा रूप अगाधा लिरिक्स

Pragati Shree Radha Roop Agadha Lyrics

प्रगटी श्री राधा, रूप अगाधा, सब सुख साधा नावे,
मुनि प्रेम अगाधा में टन वाधा, लख रहीं सोटी लजावे ।

ब्रज घर घर, माई बटे बधाई, सब मिल मंगल गाई,
कीरत बढ़ भागी, अति सुख पागी, पुरजन करत बढ़ाई ।

सुर नर मुनि हर्षे, सुम नई बरसे, चढ़े विमाना आये,
भये चित्र से ठाड़े लख सुर बाड़े, बाजे विविध बजावे ।

नारद सनकादी, शिव ब्रह्मा आदी, भगू आदिक मुनि जेते,
इंद्रादिक जे जहां सुकर ते कहा, आए सजन सवेते ।

शिव मिलकर जोरे, करत निहोरे, जय जय भानु दुलारी,
जय कीर्ति कुमारी, जय हरि प्यारी, जय जय सुखदातारी ।

जय नित्य किशोरी, प्रिय चित चोरी, यह विनती सुन लीजे,
ब्रज वास ही दीजे, ब्रज रस पीवे, चरण शरण गह लीजे ।

कर जोर मनाऊं, यह वर पाऊं, दंपति यश नित गाऊं,
पद कमल सुतोरा, मधु मुष मोरा, मन नित जहां बसाऊं ।

एहि भांति सकल सुर, स्तुति करके, निश निश धाम सिधारे,
नंदा आदिक आए, अति हर्षाए, सब मिल कंठ लगाए ।

सब ही जन गावे, सब ही बजावे, सब ही दहिले भाजे,
बरसाने आए विदिन सहाए, जय जयकार करावे,
जय जयकार करावे ।

लेखक – श्री कुंभनदास जी

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