जय प्राणधन राधा रमण श्री गोपाल भट्ट जू के लाडिले ।
जय श्याम सुन्दर अधर मुरली बजत तानन आडिले ।।
जय मोर मुकुट झूकोये बाये पीत अम्बर राज हीं ।
जय मकर कुण्डल श्रवण झूमें गण ड मंडल भ्राज हीं ।।
जय बंक नयन्न मधुर बयनन मंद मुस्कनि मुख सजे।
जय वैजयंती माल़ उर कटि किंकणी कल धुनि बजे।।
जय कर कमल लकुटी सुरंगी नव त्रिभंगी छवि लसे।
जय चरण कमलन नूपुरन सुर मंजरी गुण मन बसे।।
लेखक – श्री गुनमंजरी दास गोस्वामी जी




