प्रीतम तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।
तुम मेरे पुतरिन में बसत नित,
में तब अँखियन तारों,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
तुम मेरे मन रोम-रोम तन,
फूल सुगंध न न्यारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
तुम्हरे में वनमाल कंठ की,
तुम नैनन कजरा कारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
में मुखचन्द्र में हास्य चन्द्रिका,
सिंधु लहरी नहीं न्यारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
में तुम्हरे वनमाल पुष्प मधि,
धागा होत न न्यारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
वंशी सुधा अनुराग राग में,
पद्म गंध नहीं न्यारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
तुम रुचिकर श्याम तमाल तरुण,
में विलुलित बेलि न न्यारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
तब मुख सुख अरविंद सदन में,
नयन अलि मतवारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।
तुम मेरे पुतरिन में बसत नित,
में तव अखियन तारो,
तू मोहे प्राणन तें प्यारो ।।




