


तेरा हो जो सिर पर हाथ, कोई संकट ना आये,जीवन

जितणो दियो सरकार वो उपकार थारो है,साँवरियो सरकार तो दिलदार

आ सांवरा तेरी मैं मनवार करल्यूं,चरणां की सेवा और दुलार


तूं सोच जरा इंसान, तेरी क्या हस्ती है,दो दिन का


सांवरे दिन रात मैं तुझे याद करता हूँ,आ दरश दिखला

मेरी याद आती क्या, कभी श्याम तुमको,मैं तो ना भूलूं,

मिला दरबार दाता का, तो फिर क्यूं और दर जायें,हो