


(दोहा – अरे छाई सावन की है बदरिया,और ठंडी पड़े

भोले तेरे भक्तों को, तेरा ही सहारा है,बाबा तेरे भक्तों


गणनायक महाराज, सुमरां जोड्या दोन्यूं हाथ,गजानन्द मैहर करो ।। टेर

हे खाटूवाले श्याम, तेरी लीला न्यारी है,कोई जान नहीं पाया,

अरे क्यूं भटक रह्यो नादान, तूँ शरण श्याम की ले

दीनों के नाथ दीनन हितकारी,करते विनय प्रभु सुध लो हमारी,सांवरिया

सुन लेना घनश्याम, अरज मेरी सुन लेना ।। टेर ।।

श्री श्याम तुम्हारे चरणों में, एक बार ठिकाना मिल जाये,मैं


(दोहा – अरे छाई सावन की है बदरिया,और ठंडी पड़े

भोले तेरे भक्तों को, तेरा ही सहारा है,बाबा तेरे भक्तों


गणनायक महाराज, सुमरां जोड्या दोन्यूं हाथ,गजानन्द मैहर करो ।। टेर

हे खाटूवाले श्याम, तेरी लीला न्यारी है,कोई जान नहीं पाया,

अरे क्यूं भटक रह्यो नादान, तूँ शरण श्याम की ले

दीनों के नाथ दीनन हितकारी,करते विनय प्रभु सुध लो हमारी,सांवरिया

सुन लेना घनश्याम, अरज मेरी सुन लेना ।। टेर ।।

श्री श्याम तुम्हारे चरणों में, एक बार ठिकाना मिल जाये,मैं