सज गई महांकाल की नगरिया,
शिव का सावन आया है ।।
चली पालकी महांकाल की, बदल गया उज्जैन,
देखने अपने महांकाल को, भक्त हुए बेचैन,
डमरू की धुन बजा बजा कर, झूम रहा संसार,
महांकाल के नाम की देखो, हो रही जय जयकार,
जिसको देखो उसपे महांकाल का जादू छाया है,
सज गई महांकाल की नगरिया,
शिव का सावन आया है ।।
दिन कितना पावन आया है,
महांकाल का सावन आया है,
महांकाल तेरे दर्शन पा कर,
भक्तों का मन मुस्काया है,
आगे आगे चले महांकाल,
पीछे भक्तों का मेला है,
सज गई महांकाल की नगरिया,
शिव का सावन आया है ।।
लेखक – जयंत संखला जी




