क्या गज़ब श्रृंगार है क्या, रूप है सरकार का लिरिक्स

Kya Gajab Shringar Hai Kya Roop Hai Sarkar Ka Lyrics

क्या गज़ब श्रृंगार है क्या, रूप है सरकार का,
खिल उठा है आज मुखड़ा, साँवरे दिलदार का ।।

तर्ज – होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है ।

फूल कलियाँ सोचती हैं, कौन-सा जादू हुआ,
आज हर इक रंग जैसे श्याम के रंग में ढला,
चाँद भी नज़रें झुकाए, देख जलवा यार का,
खिल उठा है आज मुखड़ा साँवरे दिलदार का ।।

ये मुकुट, कुंडल, ये काजल, बस बहाने प्रेम के,
मुस्कुराहट में छिपे हैं भाव गहरे नेह के,
आज खुलकर मिल रहा है सार इस श्रृंगार का,
खिल उठा है आज मुखड़ा साँवरे दिलदार का ।।

रूप ऐसा मन में उतरा, फिर उतर पाया नहीं,
लाख चाहा भूल जाऊँ, भूल मैं पाया नहीं,
‘कृष्णा’ बन बैठा पुजारी आज उस दरबार का,
खिल उठा है आज मुखड़ा साँवरे दिलदार का ।।

लेखक – विकास अग्रवाल ‘कृष्णा’ जी

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