कीड़ी ने कण हाथी ने मण, सगलो हिसाब चुकावे है,
खाटू माही बेठ्यो सांवरो, सारो खेल रचावे है ।।
तर्ज – चाँद सितारे फूल और खुशबू ।
जो जल में रेहवे जीव जंतु, वे जल में सब कुछ पावे है,
जो रेहवे है इस धरती पर, वे इ धरती सु पावे है,
जारी जितनी चौंच होवे, बितनो ही चुगो चुगावें है,
खाटू माही बेठ्यो सांवरो, सारो खेल रचावे है ।।
सरकारा तो है देखि घनी, पर या सरकार अनोखी है,
इन्हे नोट वोट न कुर्सी चाहे, चाहे भावना चोखी है,
कटपुतली हां इन हाथां री, यो ही नाच नचावे है,
खाटू माही बेठ्यो सांवरो, सारो खेल रचावे है ।।
बगुला रो भोजन मछली मांस, और हंस तो मोती खावे है,
जेसो हो स्वभाव जियाको, वैसी बोली पावे है,
रंग एक है काग कोयल रो, वाणी भेद बतावे है,
खाटू माही बेठ्यो सांवरो, सारो खेल रचावे है ।।
लेखक – प्रवेश शर्मा जी




