श्याम घर आया जी नैन भर आया जी,
आओ जी आओ म्हारा श्याम,
स्वागत है आपका ।।
तर्ज़ – हम तुम चोरी से, बंधे एक डोरी से ।
बैठो बाबा बैठो, आँगणियो बुहारू,
नैना नीर बहाकर, थारा चरण पखारूँ,
हाज़िर है हर घड़ी हर घड़ी,
सेवक ये आपका ।
श्याम घर आया जी…
की करनी सु बाबा, थे म्हारा घरां पधारया,
हिवड़े से भी ज्यादा, थे लागो म्हान प्यारा,
सुधर गया ये जनम ये जनम,
तेरे इस दास का ।
श्याम घर आया जी…
बोलो बाबा बोलो, काँई मर्ज़ी थारी,
‘बनवारी’ किरपा कर, थे सुनली अर्ज़ी म्हारी,
जनम जनम सेवा करू दास रहूँ,
मैं अपने श्याम का ।
श्याम घर आया जी….
लेखक – जयशंकर चौधरी (बनवारी) जी




