वृंदावन क्यों न भए हम मोर लिरिक्स

Vrindavan Kyu Na Bhaye Ham Mor Lyrics

वृंदावन क्यों न भए हम मोर ।

करत निवास गोबरधन ऊपर, निरखत नंद किशोर ।

क्यों न भये बंसी कुल सजनी, अधर पीवत घनघोर ।

क्यों न भए गुंजा बन बेली, रहत स्याम जू की ओर ।

क्यों न भए मकराकृत कुण्डल, स्याम श्रवण झकझोर ।

‘परमानंद दास’ को ठाकुर, गोपिन के चितचोर ।

लेखक – परमानन्द दास जी

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