


मेरी बात बन रही है, तेरी बात करते करते,ये रात

ओ थारी जगमग ज्योत,जगावा बाबा श्याम,आओ पधारो म्हारे आंगनिये,ओ बाबा

इक दिन पूछा श्याम से मैंने तू मेरा क्या लगता

जैसी भी की तेरी भक्ति, वो काम आ जाये,मेरे अंत

मैंने पूछा श्याम धनि से कब दर पे बुलाओगे,तेरे दर्शन

तेरा सिंहासन क्यों हिल रहा है,क्या कोई अर्जी लगा रहा

म्हाने थे ही दिखाया खाटू धाम, मिलाया बाबो श्याम,गुरुजी म्हारा

मैं हार करके आया, मुझे श्याम अब सम्भालो,मैं ज़माने का

श्याम सुन्दर के सिवा कोई सहारा ही नहीं,उस दयालु की