


भजनों की रस गंगा में हम डुबकी लगाते हैं,डुबकी का

प्रेम जता कर कठे गया था श्याम,म्है इत् उत् ढूँढ़ा,

सोया नसीब श्याम जगादे, बाबा मुझको खाटू बुलाले,इतनी किरपा मुझपे

कैसे बताऊँ श्याम ने, क्या क्या नहीं किया,अपने गले लगाके

आ गया है मेला श्याम का चंग बजाओ जोर से,नाचो

सदा सांचा खाटू का बाबा श्यामजी,थारो ध्यान धरां म्हें लेवां

मैं हार गया हूँ बाबा, हारे का साथ निभावो,मैं बैठा

निगाहें फेर क्यूँ बैठे, मेरा तो और ना कोई,तुम्हारे लाखों

मेरे दिल का यही, अरमान साँवरे,रहने तो आ जाओ मेरे