


दीनों के नाथ दीनन हितकारी,करते विनय प्रभु सुध लो हमारी,सांवरिया

देखो कैसो झूल रह्यो नन्दजी को छैंया,होले-होले झोटा देवे यशुंमति

नाचांगा बाबा श्याम, थारी खाटू नगरी,देख तो देख दुनियां सगरी

श्याम सरकार की याद आयी,प्राण व्याकुल भये, नैण की पुतलियाँ

यहीं सोच मैंने, खुद को संभाला,इक दिन तो आएगा, मेरा

खाटू को मेलो दिखा दे रसिया,श्याम की नगरिया म्हाने प्यारी

मेरा तुम्हारा साँवरे रिश्ता जरूर है,अंजान था जो आज तक,

ओ खाटू वाले तुमसे, इतना ही माँगना,सांसों की डोर हमारी,

हे श्याम दास्तां दिल की हम, अबतक तो कह नहीं