


नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो,और चरण हो

मेरी झोपड़ी के भाग, आज खुल जाएंगे,राम आएंगे,राम आएंगे आएंगे,


दर पर तुम्हारे आया, ठुकराओ या उठा लो,करुणा के सिंधु

सीता राम जी की प्यारी,राजधानी लागे,राजधानी लागे,मोहे मिठो मिठो,सरयू जी

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,किस बात की चिंता,शरण में रख

आ ही गए रघुनंदन, सजवादो द्वार-द्वार,स्वर्ण कलश रखवादो, बंधवादों बंधन

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,राम जी चले ना

मुझे कौन जानता था,तेरी बंदगी से पहले,मैं बुझा हुआ दिया


नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो,और चरण हो

मेरी झोपड़ी के भाग, आज खुल जाएंगे,राम आएंगे,राम आएंगे आएंगे,


दर पर तुम्हारे आया, ठुकराओ या उठा लो,करुणा के सिंधु

सीता राम जी की प्यारी,राजधानी लागे,राजधानी लागे,मोहे मिठो मिठो,सरयू जी

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो,किस बात की चिंता,शरण में रख

आ ही गए रघुनंदन, सजवादो द्वार-द्वार,स्वर्ण कलश रखवादो, बंधवादों बंधन

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,राम जी चले ना

मुझे कौन जानता था,तेरी बंदगी से पहले,मैं बुझा हुआ दिया