


फिरता था एक पागल सड़कों पे मारा-मारा,रहता था अलग सबसे,

पार ना लगोगे श्री राम के बिना,राम ना मिलेगे हनुमान

अब के नवरात्रि मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,अंगना पधारो मेरे


अमृत की बरसे बदरिया,अम्बे माँ की दुअरिया ।। दातुर मोर,

श्लोक – चैत महीना और अश्विन मे,आते माँ के नवरात्रे,मुँह

आसरो बालाजी म्हाने थारो,थे कष्ट निवारो,पधारो म्हारे आंगणिये पधारो,थारी मैं

कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम,मेरी राम

सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में,निराले दूल्हे में, मतवाले


फिरता था एक पागल सड़कों पे मारा-मारा,रहता था अलग सबसे,

पार ना लगोगे श्री राम के बिना,राम ना मिलेगे हनुमान

अब के नवरात्रि मेरे अंगना पधारो जगदम्बे भवानी,अंगना पधारो मेरे


अमृत की बरसे बदरिया,अम्बे माँ की दुअरिया ।। दातुर मोर,

श्लोक – चैत महीना और अश्विन मे,आते माँ के नवरात्रे,मुँह

आसरो बालाजी म्हाने थारो,थे कष्ट निवारो,पधारो म्हारे आंगणिये पधारो,थारी मैं

कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम,मेरी राम

सज रहे भोले बाबा निराले दूल्हे में,निराले दूल्हे में, मतवाले