


जुग जुग जीवे री यशोदा मैया, तेरो ललना,तेरो ललना री

ऐसो चटक मटक सो ठाकुर, तीनों लोकन हूँ में नाय,तीनों

जादू करके, जादू करके, जादू करके,ओ पिया कित गयो जादू

मेरो मन वृंदावन में अटको,मेरो मन हरि चरणन में अटको,बनके

काली कमली ने ऐसा रंग डाला,के रंग कोई चडता नहीं,ओ

घनश्याम तुम्हारे मंदिर में,मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ,वाणी में तनिक

मैंने जबसे हरि जी तेरा नाम लिया,अभिमान दिखाना छोड़ दिया,ओ

आज सखि जो मै प्रितम पाँऊ,तो अपनों बड़ भाग्य मनाऊ

कोई जाये जो वृन्दावन, मेरा पैगाम ले जाना,मैं खुद तो