
नाम हरी का अनमोल है, अमृत रस है भरा लिरिक्स
नाम हरी का अनमोल है,अमृत रस है भरा,जितना भजोगे उतना

नाम हरी का अनमोल है,अमृत रस है भरा,जितना भजोगे उतना

हरि का भजन करो, हरि है तुम्हारा,हरि के भजन बिन,

जगन्नाथ (जगन्नाथ) चकानयन (चकानयन),नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें

सांवरिया ले चल परली पार,जहां विराजे राधा रानी,मेरी अलबेली सरकार

लाज रखो गिरिधारी,मोरी लाज रखो गिरिधारी ।। जैसी लाज राखी

राणे वर रा काई पर्णीजूं, जनम जनम मर जावै,वर परणीजू

हमे रास्तो की जरूरत नहीं है,हमे तेरे पेरो के निशान

आओ भोग लगाओ मेरे मोहन,दुर्योदन की मेवा तयादी,साद विधुर घर

नाम है तेरा तारण हारा,कब तेरा दर्शन होगा,जिनकी प्रतिमा इतनी

बांके बिहारी की देख छटा,मेरो मन है गयो लटा पटा