हमारें माई श्यामा जू कौ राज |
जाके अधीन सदाई साँवरौ या ब्रज कौ सिरताज ||
यह जोरी अविचल वृन्दावन नाहिं आन सों काज |
श्री विट्ठल विपुल बिहारिनि के बल दिन जलधर ज्यौ गाज ||
लेखक – श्री विठ्ठल विपुल देव जी महाराज
[भाव अर्थ (इसे गाते नहीं है, यह सिर्फ ये प्यारा भाव समझने के लिए लिखा गया है) –
हमारी माई श्री श्यामा जू का नित्य राज है।
रसिकों के सिरमौर और ब्रज के राजा, श्री कृष्ण भी सदैव जिनके अधीन रहते हैं, वे श्री राधा ही हैं।
श्री राधा-कृष्ण की यह दिव्य जोड़ी नित्य वृंदावन में विहार करती है, मानो उनके जीवन का और कोई उद्देश्य न हो।
इनका संपूर्ण जीवन अपनी सखियों को दिव्य प्रेमरस में लीन करने के लिए ही है।
श्री विट्ठल विपुल देव जी के अनुसार, उन्हें भी अपनी प्रियतम, श्री राधारानी के बल पर ही यह अनंत विहार रस प्राप्त होता है।]




