नख पर धार लियो गिरिराज, नाम गिरधारी पायो है ॥
सुरपति पूजा मेट कृष्ण, गिरिराज पुजायो है,
सवा लाख मण सामग्री को भोग लगायो है ।
पडी स्वर्ग में खबर क्रोध, सुरपति को छायो है,
मूसलधार अपार बहुत, पानी बरसायो है ।
पड़ी ना ब्रज पर बूंद, इंद्र देखत घबरायो है,
ब्रजवासी सब कहे, धरण गिरिराज उठायो है ।
धन धन श्री ब्रजचंद्र, इंद्र को मान घटायो है,
‘घासीराम’ गोवर्धन वारो, हरि जस गायो है ।
लेखक – घासीराम जी (गोवर्धन वारे)




