खर्चो भेज दे साँवरिया फागण मेलो आयो रे…खर्चो भेजदे,
मैं सूत्यो थो सपने में थारो, हेलो आयो रे…खर्चो भेजदे ।।
तर्ज – धमाल ।
म्हे आश्या घर का ने लाश्या, कपडा नया सीमाश्या जी,
टिकट कटास्या गाडी की भई, यो खर्चो आयो रे…खर्चों भेज दे,
खर्चो भेज दे साँवरिया फागण मेलो आयो रे…खर्चो भेजदे ।।
तू तो हेलो मार दियो बाबा, थारो काई लागे रे,
अरे गठड़ी खोलन काई बाबा, क्यों शरमायो रे…खर्चो भेजदे
खर्चो भेज दे साँवरिया फागण मेलो आयो रे…खर्चो भेजदे ।।
मनी ऑर्डर भिजवादे फिर चाहे, बारह महीना राखले,
‘बनवारी’ खर्चो मोटो हैं, भेज सवायो रे…खर्चो भेजदे
खर्चो भेज दे साँवरिया फागण मेलो आयो रे…खर्चो भेजदे ।।
लेखक – जय शंकर चौधरी जी




