घूमर घाल रे भाया, घूमर घाल रे भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ।।
घणा दिना स्यू दिकता यो, आनंद उत्सव आयो (स२),
सजकर बेठ्यो श्याम हमारो, देख यो मन हर्षायो,
दर्शन करले रे भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ।।
भांति भांति का इतर लगाया, महक रयो दरबार,
आज बड़ो ही मूलक रयो है, श्याम धणी दातार,
प्रेम से देख ले भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ।।
भाव देखकर प्रेमियों को, खोल दियो भण्डारो,
खुद हाथां से लुटा रयो है, बाबो खाटू वालो,
‘जीतू’ लूट ले भाया,
आज उड़े आनंद श्याम को, मौज ले भाया ।।
लेखक – जयंत सारदा (जीतू) जी




