
इक बार सांवरे के, दरबार आइये लिरिक्स
इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

भावों को सुनता है कुछ न कहता है,सच्चे प्रेमी से



तुम्हारी मेरी बात, के जाणेगो कोई,है कितनी दफाईं, ये पलकां



(चाँद धुंदला गया, छोर बदली हवा,चंद लम्हो में बस होर


मन बावरे करले भरोसो बाबा श्याम पे,दूसरो ना कोई जग

इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

भावों को सुनता है कुछ न कहता है,सच्चे प्रेमी से



तुम्हारी मेरी बात, के जाणेगो कोई,है कितनी दफाईं, ये पलकां



(चाँद धुंदला गया, छोर बदली हवा,चंद लम्हो में बस होर


मन बावरे करले भरोसो बाबा श्याम पे,दूसरो ना कोई जग