
इक बार सांवरे के, दरबार आइये लिरिक्स
इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

इक बार सांवरे के, दरबार आइये,चरणों में सिर झुकाइये, मन

भावों को सुनता है कुछ न कहता है,सच्चे प्रेमी से

हमे रास्तो की जरूरत नहीं है,हमे तेरे पेरो के निशान

जब जब भी इन्हें पुकारा, कान्हां ने दिया सहारा,ये दूर

तुम्हारी मेरी बात, के जाणेगो कोई,है कितनी दफाईं, ये पलकां

लुट रहा, लुट रहा, लुट रहा रे,श्याम का खजाना, लुट

कण कण में वास हे जिसका, तिहु लोक में राज

(चाँद धुंदला गया, छोर बदली हवा,चंद लम्हो में बस होर

गजानन्द को एक स्वर से पुकारो, करो सिद्ध बेगा सा,

मन बावरे करले भरोसो बाबा श्याम पे,दूसरो ना कोई जग