माई की सेवा दिल से कर,
नर्मदे नर्मदे नर्मदे हर,
नर्मदे हर जीवन भर,
माई की सेवा दिल से कर ।।
जो भी दिल से जाप करे,
उसके दुख संताप हरे,
उसके दुख संताप हरे,
काहे को भटके तू दर दर,
नर्मदे हर जीवन भर,
माई की सेवा दिल से कर ।।
पावन है मैया का नाम,
जपले बन्दे सुबहो शाम,
जपले बन्दे सुबहो शाम,
श्रद्धा से तू सुमिरन कर,
नर्मदे हर जीवन भर,
माई की सेवा दिल से कर ।।
दुख हरनी सुखदाती माँ,
वरदायक वरदाति माँ,
वरदायक वरदाति माँ,
आये दुआरे शिव शंकर,
नर्मदे हर जीवन भर,
माई की सेवा दिल से कर ।।
दीप माई का ध्यान धरे,
सारा जग गुणगान करे,
सारा जग गुणगान करे,
शीतल धार बहे झर झर,
नर्मदे हर जीवन भर,
माई की सेवा दिल से कर ।।
लेखक – प्रदीप राजपूत जी




