तेरा कर्जा सांवरिया, मैं कैसे चुकाऊंगा,
तूने इतना दिया बाबा, मैं कैसे भुलाऊंगा ।।
तर्ज – ऐ मेरे दिले नादाँ ।
तुमने मेरे जीवन को, हाथों से संवारा है,
किरपा की किरणों से, चमका ये सितारा है,
तूने जितना निभाया है, मैं कैसे निभाऊंगा,
तेरा कर्जा सांवरिया, मैं कैसे चुकाऊंगा ।।
मुझ नालायक को भी, दरबार बुलाता है,
मेरा लाड लड़ाता है, गोदी में सुलाता है,
एहसान तेरा इतना, मैं कैसे जताऊंगा,
तेरा कर्जा सांवरिया, मैं कैसे चुकाऊंगा ।।
मेरी हर गलती को, अनदेखा करता है,
‘जीतू’ के हक में तू, सारे जग से लड़ता है,
चाहे लूं जन्म हजार, मैं तेरा ऋणी कहलाऊंगा,
तेरा कर्जा सांवरिया, मैं कैसे चुकाऊंगा ।।
लेखक – जयंत सारदा (जीतू) जी




