सेवा लेवे सेवकिये सू, यो मिज़ाजी श्याम,
संवरो भकता को,
भकता को यो भकता को, सेठ संवरो भकता को,
रूप निखारे और संवारे, होवे भगत रो नाम,
संवरा भकता को ।।
तर्ज – खाटू वाले हमें बुलाले ।
शीश झुकाए सेवकियो, श्री चरणा में लोट रहेयो,
झांकी थारी खूब सजी, ख़ुद के मन मैं डोल रहेयो,
हाथ पकड़ मैरो ख़ुद ही साजे, प्यारो बाबो श्याम,
संवरो भकता को ।।
हाथ जोड़ के अरज करूँ, सेवा थारी पाई जी,
चरना माई राखी जो, दाता श्याम बिहारी जी,
भूल चूक होवन मत दीजो, तोड़ दो सब अभिमान,
सवाँरो भकता को ।।
एक से एक कलाकारी, थारो दर को भिकारी है,
भाव देख कर सेवा में, राखे श्याम बिहारी है,
बाबो राजी सेवक राजी, देख रहियो संसार,
सवाँरो भकता को ।।




