

मैं दो-दो माँ का बेटा हूँ, दोनों मैया बड़ी प्यारी

मेरा नाथ तू हैं नहीं मैं अकेला, मेरे साथ तू

कृपा का ये नजारा, समझो तो है इशारा ।। तर्ज

हरदम रहता साथ वो मेरे,सांझ कहु या कहु सवेरे,उसकी कृपा

खाटू बुला रहा हैं, किरपा नहीं तो क्या हैं,अब तक

तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया,जन्मों की प्यास

तू खाटू बुलाता रहे और मैं आता रहूं || (ख्याल

हाथ जोड़कर मांगता हूँ ऐसा हो जनम,तेरे नाम से शुरु,