दिन दुख्यारों का रेला देखलो,
आओ खाटूवाले का मेला देखलो ।।
लोग कहते हैं कि दिन दुख्यारे,
अक्सर तन्हा रहते हैं,
कोई भी नहीं है अकेला देखलो,
आओ खाटूवाले का मेला देखलो ।।
कढ़ी कचौरी, दाल-चूरमा,
सब प्रकार के व्यंजन हैं,
गाजर, मूली, ककड़ी का ठेला देखलो,
आओ खाटूवाले का मेला देखलो ।।
सच्चे मन से श्री चरणों में,
जो अरदास लगाता है,
उनको ही मारता है हेला देखलो,
आओ खाटूवाले का मेला देखलो ।।
लेखक – शुभम रूपम जी




